गुरु हर राय जी

महत्वपूर्ण जानकारी
=> गुरु हर राय जी सिख धर्म के सातवें सिख गुरु थे।
=> गुरु हर राय जी का जन्म 16 जनवरी, 1630 को कीरतपुर साहिब (पंजाब) में हुआ। यहाँ गुरु जी का जन्म हुआ वहाँ पर “गुरुद्वारा शीश महल साहिब जन्म स्थान पातशाही सातवीं व आठवीं” बना हुआ है।

=> गुरु हर राय जी के पिता का नाम बाबा गुरदित्ता जी और माता का नाम निहाल कौर था। माता निहाल कौर को अन्नति/माता बस्सी/नेट्टी के नाम से भी जाना जाता है। गुरु हर राय जी गुरु हरगोबिन्द जी के पोते और बाबा गुरदित्ता जी के छोटे बेटे थे।
=> गुरु हर राय जी के बड़े भाई और बाबा गुरदित्ता जी के बड़े बेटे का नाम धीर मल था।
=> गुरु जी का परिवार “सोढ़ी खत्री” था।
=> 29 जून 1640 को गुरु हर राय जी का विवाह मोहल्ला मदार गेट, अनूपशहर ( बुलंदशहर), उत्तर प्रदेश के भाई दया राम जी की बेटी कृष्ण कौर जी (किशन कौर जी) के साथ हुआ। जिन्हें सुलखनी जी के नाम से भी जाना जाता है। जिस स्थान पर विवाह हुआ वहाँ पर “गुरुद्वारा सातवीं पातशाही गुरु हर राय साहिब” बना हुआ है।
=> गुरु हर राय जी और माता किशन कौर जी के दो बेटे राम राय जी (1645) व हर कृष्ण जी (1656) और एक बेटी रूप कौर जी (1649) थी।
=> 3 मार्च, 1644 को गुरु हरगोबिन्द जी ने अपने पोते और बाबा गुरदित्ता जी के छोटे बेटे हर राय जी को गुरु गद्दी प्रदान की। गुरु हर राय जी ने 19 मार्च, 1644 को गुरु का पद ग्रहण किया।
=> गुरु पद ग्रहण करने के बाद गुरु हर राय जी ने कीरतपुर साहिब में गुरु हरगोबिन्द जी द्वारा लगाये “नौ लखा बाग” में आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ लगवाई। तथा एक आयुर्वेदिक औषधि अस्पताल और अनुसंधान केंद्र भी स्थापित किया।
=> 11 मार्च, 1645 को कीरतपुर साहिब में गुरु हर राय जी के घर माता किशन कौर जी ने बाबा राम राय जी को जन्म दिया। बाबा राम राय जी ने आगे चल कर देहरादून की स्थापना की।
=> 8 अप्रैल, 1649 को कीरतपुर साहिब के शीश महल में ही गुरु हर राय जी के घर माता किशन कौर जी ने रूप कौर को जन्म दिया। जो सिख धर्म की पहली पढ़ी-लिखी और विद्वान महिला थी। बीबी रूप कौर जी ने 1661 में “गुरु के मुँह दियाँ साखियां” नामक पोथी लिखी। इस कृति को “पोथी बीबी रूप कौर जी” के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें उनके पिता गुरु हर राय जी के गुरुत्व से संबंधित 32 साखियां है।
=> 1650 में मुग़ल सम्राट शाहजहाँ का सबसे बड़ा बेटा दारा शिकोह बहुत अधिक बीमार हो गया। किसी भी जड़ी-बूटी, टोटके, तंत्र या मंत्र ठीक नहीं हो रहा था। शाहजहाँ को अपने मंत्री से पता चला की गुरु हर राय जी जड़ी-बूटियों से लोगों का इलाज करते है। तो उन्होंने गुरु जी को पत्र लिख कर अपने बेटे की बीमारी के बारे में बताया। गुरु हर राय जी ने दारा शिकोह के लिए जड़ी-बूटियों से बनी आयुर्वेदिक दवाई भेजी। जिससे दारा शिकोह बिल्कुल ठीक हो गए। ठीक होने के बाद दारा शिकोह गुरु हर राय जी से मिलने या दर्शन करने कीरतपुर साहिब आए।
=> 7 जुलाई, 1656 को गुरु हर राय जी के घर माता किशन कौर जी ने कीरतपुर साहिब में हर कृष्ण जी को जन्म दिया। हर कृष्ण जी आगे चल कर सिख धर्म के आठवें सिख गुरु बने।
=> गुरु हर राय जी ने 360 मंजियों की स्थापना की। और सुथरे शाह जी, साहिबा जी, संगतिया जी, मियां साहिब जी, भगत भगवान जी, भगत मल जी और भगत जीत मल जी (बैरागी) जैसे पवित्र व प्रतिबद्ध भगतों को मंजियों के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया।
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